जब खोज रुकती है, तभी राह शुरू होती है Newsupdateindia
*जब खोज रुकती है, तभी राह शुरू होती है* -- डॉ. तनु जैन *क्या आपने कभी खुद को लगातार तलाश करते हुए पाया है—नई संभावनाओं के लिए, नए रास्तों के लिए, जीवन में “सफल” होने के नए तरीकों के लिए?* रिपोर्ट: रविंद्र आर्य हम लगातार प्रयास करते हैं—सफलता, स्पष्टता और सुख पाने के लिए। परंतु, इतने प्रयासों के बावजूद भी कभी-कभी परिणाम शून्य ही रह जाते हैं। हम ज़ोर लगाते हैं, मेहनत करते हैं, लेकिन फिर भी दरवाज़े बंद ही रहते हैं। कई बार एक दिशा में असफलता मिलने के बावजूद हम उसी रास्ते पर चलते रहते हैं, बिना रुके, बिना पूछे—क्या यह मार्ग वास्तव में मेरे लिए है? ऐसे क्षणों में हम ईश्वर से भी नाराज़ हो जाते हैं—कि सब कुछ क्यों नहीं ठीक हो रहा। हम संघर्ष में इतने उलझ जाते हैं कि यह नहीं समझ पाते: कई बार ठहराव असफलता का नहीं, दिशा-परिवर्तन का संकेत होता है। हो सकता है वह मार्ग हमारे लिए बना ही न हो। शायद जीवन हमें इशारा दे रहा हो कि हम धारा के विरुद्ध तैरना बंद करें। वहीं से सच्ची बुद्धिमत्ता शुरू होती है—छोड़ देने में। एक गहरी साँस लेने में, पीछे हटकर जीवन या ईश्वर की योजना को स्वीकार करने ...